ग्वालियर में श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर के जीर्णोद्धार का भव्य शिलान्यास, धार्मिक उत्साह का माहौल
Grand foundation-laying ceremony
श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर का जीर्णोद्वार के लिए हुआ शिलान्यास समारोह।
1200 वर्ष मंदिर की वेदी हुआ शिलान्यास, संत निवास के साथ मंदिर निर्माण होगा।
मंदिर बनवाने व जीर्णोद्धार कराना सबसे बड़ा पुण्य कार्य- मुनिश्री
ग्वालियर - : Grand foundation-laying ceremony, अतिशय क्षेत्र 1200 वर्ष प्राचीन श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर का जीर्णोद्वार के लिए नवनिर्मित भव्यातिभव्य जिन मंदिर निर्माण एवं शिलान्यास समारोह आज रविवार को परम पूज्य गुरुदेव मुनिश्री विनय सागर महाराज के सानिध्य चौधरी गार्डन बनवार ग्वालियर में आयोजित किया गया। यह आयोजन श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं सकल दिगंबर जैन वरैया समाज बनवार की ओर से आयोजित किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग उपस्थित थे।
जैन समाज के प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि मुख्य प्रतिष्ठाचार्य डॉ आशीष जैन ने वस्तु ओर शांति विधान करवाया। वही आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर का शिलान्यास का शुभारंभ राजेंद्र जैन ने जैन पचरंगी ध्वजा फहराकर किया। वही मंच का उद्घाटन धर्मचंद वरैया ने किया। वही गुरुदेव विराग सागर के चित्र का आवरण विनीश कुमार ओर नमन कुमार जैन एवं दीप प्रज्वलित सुमतचंद्र जैन ओर वीरेंद्र जैन ने किया। प्रतिष्ठाचार्य शुभम जैन ओर पंडित हुकुमचंद जैन ने वैदिक मंत्रों का उच्चारण कर नवीन जिन मंदिर की मुख्य शिलान्यास मुकेश जैन परिवार ने किया।आयोजन समिति के मुख्य मार्गदर्शक नरेंद्र जैन सोनू, अध्यक्ष प्रकाश चंद्र जैन, मंत्री राकेश जैन, कोषाध्यक्ष दीपेश जैन, उपाध्यक्ष हितेंद्र जैन अन्य पदाधिकारियों ने अतिथियों को साफा पहनकर दुपट्टा उड़ाकर सम्मानित किया।
इन्होंने किया वेदी का शिलान्यास
जैन समाज प्रवक्ता सचिन जैन ने बताया कि वेदी का शिलान्यास में ध्यानेंद्र शिला विमल देवी जैन, सोने की शिला प्रवीण जैन ने रखी। वही गैंती दिनेश जैन, अशोक कुमार जैन, फावड़ा राजकुमार जैन धरम वरैया, तसला मुकेश जैन, सुनील लोहिया, कन्नी मनोज जैन, गुणमाला नेमीचन्द जैन, गुनिया अमृता जैन दीपेंद्र कुमार जैन ने राखी। सोने ओर चांदी की शिलाएं महिला ओर पुरुषों ने राखी।
मंदिर बनवाने व जीर्णोद्धार कराना सबसे बड़ा पुण्य कार्य- मुनिश्री
मुनिश्री विनय सागर महाराज ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मंदिर निर्माण करने से बड़ा और कोई पुण्य कार्य नहीं हो सकता। इससे हमारी भारतीय संस्कृति सुरक्षित रहती है। समाज की नींव व्यक्ति है और व्यक्ति की नींव जीवन है। यदि जीवन शुद्ध है तो व्यक्ति सशक्त होगा। यदि व्यक्ति सशक्त होगा तो समाज सशक्त होगा।सच्चाई और नैतिकता जीवन की रीढ़ हैं, करुणा और सहयोग हमारे जीवन का रक्त हैं। अनुशासन और संयम हमारी साँसें हैं। धर्म तथा मूल्य हमारी आत्मा हैं। वही मुनिश्री के चरणों में श्रीफल भेट ग्वालियर, शिवपुरी, घाटीगांव, डबरा, भोपाल, करहिया, चीनोर, दिल्ली, भितरवार आदि जगहों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने समर्पित किए।